होम लोन प्रॉपर्टी खरीदने में फंडिंग की सुविधा प्रदान करने के लिए लोकप्रिय हो रहे हैं. हालांकि, होम लोन को लेकर विभिन्न प्रकार की गलत धारणाएं या मिथक होते हैं. होम लोन को बेहतर ढंग से समझने के लिए, यह बहुत जरूरी है कि आप तथ्यों पर ध्यान दें और मिथकों को अपने मन से निकाल फेंके. होम लोन से जुड़े कुछ आम मिथक हैं:

 
LOW INTEREST RATES ARE ONLY CRITERIAमिथक 1 -

कम ब्याज दर ही एकमात्र मानदंड है

बॉरोअर आमतौर पर एकदम उस लेंडर की तरफ आकर्षित होते हैं जो बाज़ार में सबसे कम ब्याज दर का ऑफर देता है. वे सिर्फ ब्याज दरों के आधार पर अपना निर्णय लेते हैं और कई अन्य आवश्यक बिंदु नज़रअंदाज़ कर देते हैं. अगर कोई लेंडर कम ब्याज दरों पर लोन दे रहा है तो हो सकता है कि वो प्रोसेसिंग फीस अधिक ले रहा हो, प्रीपेमेंट पर पेनल्टी लगा रहा हो या फिर कोई अन्य शुल्क ले रहा हो. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि लोन की शर्तों का (सभी शुल्कों सहित) समग्र रूप से विश्लेषण किया जाए.

 
Rbi Fixes Interest Rate On Home Loansमिथक 2 -

RBI होम लोन की ब्याज दरों का निर्धारण करता है

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) व्यापक बाजार ब्याज दरों का निर्धारण करता है. हालांकि, यह व्यक्तिगत लेंडर्स के लिए होम लोन की ब्याज दरें तय करने के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी नहीं होता है. लेंडर (हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां, बैंक आदि) अपने फंड्स की लागत के आधार पर होम लोन की ब्याज दरों का निर्धारण करते हैं. यही कारण है कि विभिन्न लेंडर्स की होम लोन ब्याज दरें अलग-अलग हो सकती हैं.

 
Fixed Rate Home Loans Are Better Than Floating Rate Loansमिथक 3 -

फिक्स्ड रेट होम लोन, फ्लोटिंग रेट होम लोन से बेहतर होते हैं

बात जब फिक्सड रेट होम लोन की आती है तो यह आपको हर महीने एक निश्चित ब्याज राशि का भुगतान करने की सुनिश्चितता प्रदान करता है, लेकिन इसका नुकसान यह है कि अगर लेंडर अपनी ब्याज दरों को कम कर देता है, तो फिक्स्ड रेट होम लोन के ग्राहकों को इस कटौती का फायदा नहीं मिल पाता है.

 
Getting A Home Loan Authenticates The Title Of The Propertyमिथक 4 -

किसी प्रॉपर्टी पर होम लोन लेना उस प्रॉपर्टी के मालिकाना हक की पुष्टि करता है

यह होम लोन के बारे में प्रचलित सबसे बड़े मिथकों में से एक है. यद्यपि लेंडर प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंटेशन और दूसरे पहलूओं की गहराई से जांच करता है, फिर भी प्रॉपर्टी की टाइटल डीड या इसके मालिकाना हक की सत्यता की पुष्टि करना पूरी तरह से प्रॉपर्टी खरीदने वाले की जिम्मेदारी होती है.

 
Prepayment Is The Best Policyमिथक 5 -

प्रीपेमेंट करना सबसे अच्छी पॉलिसी है

अगर किसी बॉरोअर के पास अतिरिक्त धनराशि होती है तो वह अपने होम लोन का जल्द से जल्द प्रीपेमेंट कर देना चाहता है. लेकिन सवाल यह है कि, क्या प्रीपेमेंट कर देना हर स्थिति में बेहतरीन विकल्प होता है? प्रीपेमेंट अगर होम लोन लेने के शुरूआती दिनों में ही कर दिया जाए (जब ब्याज के भुगतान वाला भाग अधिक होता है), तभी यह फायदेमंद होता है. इसके अलावा, होम लोन के रीपेमेंट और होम लोन पर भुगतान किए गए ब्याज पर टैक्स लाभ मिलते हैं, जिनकी मदद से बॉरोअर अपने टैक्स खर्चों में कमी ला सकता है. इसके अलावा, चूंकि होम लोन की दरें आमतौर पर अन्य लोन दरों के मुकाबले कम होती हैं, बॉरोअर इस अतिरिक्त धनराशी के उपयोग से कोई अन्य इन्वेस्टमेंट कर सकता है, जिस से उसे बेहतर लाभ मिल सके. इस प्रकार, आम धारणा के विपरीत, प्रीपेमेंट हमेशा लाभकारी नहीं होता है.

होम लोन लेना एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है, जिसे लेने से पहले बॉरोअर को उचित जांच पड़ताल कर लेनी चाहिए. किसी भी होम लोन उत्पाद का चयन करने से पहले होम लोन के सभी पहलूओं का मूल्यांकन करना आवश्यक है.

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