जिस तेजी से हमारा पर्यावरण बिगड़ रहा है, जल संकट बढ़ रहा है और वायु प्रदूषण बढ़ रहा है; उसे देखते हुए प्रकृति के संरक्षण के तरीकों को अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है. ‘गो ग्रीन' बहस का नया विषय है और निर्माण उद्योग भी निश्चित रूप से इससे अछूता नहीं है. चूंकि निर्माण उद्योग का आंतरिक और बाहरी पर्यावरणीय चीज़ों जैसे कि वायु, जल, प्राकृतिक संसाधन, सामग्री इत्यादि पर बड़ा प्रभाव पड़ता है, इसलिए 'ग्रीन बिल्डिंग' ही निश्चित रूप से आगे बढ़ने का सही रास्ता है.

डेवलपर्स को पर्यावरण के अनुकूल विकास करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए, राज्य सरकारों ने अपनी नीतियों में संशोधन करके डेवलपर्स के लिए उनके नए प्रोजेक्ट्‌स में पर्यावरण के अनुकूल सुविधाएं शामिल करना अनिवार्य बनाना शुरू कर दिया है. ये ग्रीन बिल्डिंग्स न केवल पर्यावरणीय लाभ प्रदान करती हैं बल्कि जीवन की बेहतर क्वॉलिटी के साथ-साथ लंबे समय में वित्तीय लाभ प्रदान कर निवासियों को आर्थिक फायदा भी देती हैं.

go greenबिजली के बिल में कमी

आंतरिक और बाहरी जगहों में हीटिंग और रोशनी की ज़रूरतें पूरी करने के लिए-सोलर फोटो-वोल्टिक पैनल’ की स्थापना, ग्रीन बिल्डिंग्स की एक प्रमुख विशेषता है. चूंकि मोटे तौर पर आधी बिजली की खपत कूलिंग, हीटिंग और रोशनी के लिए होती है, इसलिए सोलर पैनल लगाने से बिजली के मासिक बिलों में कमी के साथ-साथ ऑपरेटिंग कास्ट भी कम हो जाती है. बिजली के बिल को और कम करने के लिए डेवलपर्स, एनर्जी स्टार रेटेड उपकरण भी प्रदान करते हैं. आजकल, बड़ी संख्या में ग्रीन बिल्डिंग्स अपनी अतिरिक्त बिजली नेशनल पॉवर ग्रिड को सप्लाई करती हैं, जिससे बिजली के बिलों में छूट मिलने के साथ व्यापक राष्ट्रीय हित भी पूरे होते हैं.

इन इंस्टालेशनों के अलावा, कईप्रोजेक्ट्‌स ने सोलर पथ, हवा की दिशा, जलवायु के प्रकार, आदि के आधार पर ट्रेडीशनल बिल्डिंग आर्किटेक्चर और डिज़ाइन को भी अपनाया है. इन तरीकों से दिन में ज्यादातर समय कमरों में बेहतर रोशनी मिलती है, जिससे बिजली का उपयोग कम हो जाता है.

go greenभूजल उपयोग में कमी

ये प्रोजेक्ट रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और वेस्ट वॉटर रिसाइकिलिंग सिस्टम्स से सुसज्जित हैं जो लैंडस्केपिंग के साथ फ्लशिंग की ज़रूरतें पूरी करने के लिए भी उपयोग किए जा सकते हैं. ये सिस्टम भूजल, तथा म्यूनिसिपल सप्लाई वाले पानी पर भी निर्भरता कम कर देते हैं. इन सिस्टमों के अलावा, पानी के उपयोग को और कम करने के लिए डेवलपर्स लो-फ्लो और सेंसर-आधारित फिक्सचर्स का भी उपयोग करते हैं.

go greenबेहतर स्वास्थ्य और उत्पादकता

हवा और पानी की गुणवत्ता में सुधार करना ग्रीन बिल्डिंग्स का एक और लक्ष्य है, जिससे निवासियों के स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार हो. कम वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों वाली सामग्री, पेंट और एड्‌हेसिव का उपयोग, इसे प्राप्त करने के कुछ तरीके हैं. ये यौगिक अगर बड़ी मात्रा में हों, तो स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं.

go greenकचरा प्रबंधन

ग्रीन बिल्डिंग्स में कचरे को अलग-अलग करने तथा कचरे को जैविक खाद में बदलने की भी व्यवस्थाएं होती हैं. यह रेजिडेंशियल सोसाइटी के लिए अतिरिक्त इन्कम का स्रोत भी बन सकता है. ये बिल्डिंग्स, अपने निवासियों को उनके दैनिक जीवन में संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने के लिए शिक्षित करती हैं.

go greenअधिक मार्केट वैल्यू

आमतौर पर यह देखा जाता है कि जिन घरों और कार्यालयों को पर्यावरण अनुकूल सुविधाओं से सुसज्जित किया जाता है उनकी रिसेल वैल्यू अधिक बनी रहती है, क्योंकि उनके उपयोग और रखरखाव की लागत पारंपरिक इमारतों की तुलना में कम होती है.

go greenबैटरी संचालित कारों के लिए प्रावधान

वैकल्पिक और कम उत्सर्जन करने वाले वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन बिल्डिंग में बैटरी चार्जिंग स्टेशन की भी व्यवस्था होती है.

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