अब फूलों का उपहार देने की बजाय, फूलों का बगीचा बनाने की सोचें. गुलाब के पौधों को उगाने के लिए सर्दियों का मौसम सबसे अच्छा रहता है. तो अपने घर और बगीचे को महकाने के लिए पढ़ें.

गुलाब ठंडी और समशीतोष्ण जलवायु में पनपता है, न कि भारत में पड़ने वाली शुष्क गर्मियों में. यही कारण है कि गुलाब उगाने के लिए पुणे, चंडीगढ़ और बेंगलुरु जैसी जगहें उपयुक्त मानी जाती हैं. गुलाब उगाने के लिए सबसे पहले एक ऐसी जगह का चुनाव करें जहां कम से कम 6 घंटे धूप आती हो. देखभाल करने के लिए, नियमित रूप से निषेचन करें, खाद डालें और जड़ों के आस-पास की मिट्टी को सूखने से बचाने के लिए नियमित गुड़ाई करते रहें. इसके अलावा मृत टहनियों और पत्तियों की नियमित रूप से छंटाई करते रहें क्योंकि इससे पौधा लंबी अवधि में नियमित रूप से फूल देता रहता है. रूटस्टॉक सकर को हटाना भी गुलाब की झाड़ी की स्वस्थ वृद्धि के लिए अति आवश्यक है. गर्मियों के समय में गुलाब के पौधे को हफ्ते में कम से कम तीन बार अच्छी तरह से पानी देना पड़ता है. इस लेख में हमने भारत में बेहतर तरीके से उगने वाले कुछ गुलाब के पौधों की सूची दी है

भारतीय लाल गुलाब

अगर आप बागवानी में नए हैं तो यह आपके लिए बेहतरीन विकल्प है. यह एक सुगंधित, आसानी से फूल देने वाला पौधा होता है और इसे गमलों में भी उगाया जा सकता है. संकरण के बाद आपको गुलाबी या नारंगी फूल भी मिल सकते हैं, लेकिन इनकी खुशबू हमेशा ही मनमोहक होती है. चूंकि यह गुलाब बेहद विपरीत परिस्थितियों को झेल लेता है, इसलिए इसे उगाना और बनाए रखना आसान होता है. फूलों में एकल परतें होती हैं और फूल पूरी तरह से खिलते हैं. इसे बस सूरज की रोशनी, नियमित रूप से पानी और खाद की जरूरत होती है. हर साल, बारिश के बाद नए पौधे बनाने के लिए इसकी कटाई की जा सकती है.  

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क्लाइम्बर या बेलें

बेल के रूप में उपर चढ़ने वाले ये गुलाब हालांकि खुशबू के मामले में कोई खास नहीं होते, लेकिन अगर आप केवल गुलाब का एक बगीचा बना रहे हैं तो उसे विविधता देने के लिए ये गुलाब जरूरी होते हैं.

इन गुलाबों को कभी भी दीवार के सहारे नहीं लगाना चाहिए. इसके बजाय, दीवार और पौधे के बीच एक जाली लगा देना बेहतर रहता है. इसके सहारे-सहारे फूल खड़े होते जाएंगे. कभी-कभी फूलों का आकार टी-रोज़ से भी बड़ा होता है. क्लाइम्बर गुलाबों को पहले दो वर्षों तक छंटाई की आवश्यकता नहीं होती, और जब भी आप इनकी छंटाई करें, हल्की छंटाई ही करें. 

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हाइब्रिड टी-रोज़

गुलाब की शान की बात करें तो टी-रोज़ दुनिया भर में विख्यात है. यह एक लंबे तने वाली खूबसूरत झाड़ी होती है जो लेवेंडर से लेकर नारंगी रंग तक के सुगंधित गुलाब के फूल देती है. इस पौधे में बार-बार फूल आते हैं, और कली को पूरी तरह से खिलने में लंबा समय लगता है.

ग्रैंडीफ्लोरा

वे लंबे पौधे होते हैं जिनमें फ्लोरिबंडस जैसी खिलने की क्षमता और टी-रोज़ जैसे लंबे तने होते हैं, हालांकि इनमें सुगंध नहीं होती है. मौसम में ये फूल लगातार खिलते हैं. ग्रैंडीफ्लोरा विपरीत परिस्थितियों को झेल लेता है और आसानी से उगता है.

मिनिएचर

यह पादप भी विपरीत परिस्थितियों को आसानी से झेल लेता है, और जैसा की नाम से स्पष्ट है, इनके फूल आकार में छोटे होते हैं, और झाड़ी भी लगभग 24 इंच की ही होती है. ये आसानी से और बार-बार खिलने वाले फूल होते हैं. ये पादप रोगों के लिए प्रतिरोधी भी होते हैं. एकल-पंखुड़ी के ये फूल नाजुक होते हैं, और चूंकि ये आसानी से भारतीय जलवायु में रम जाते हैं, इसलिए इन्हें देसी भारतीय लाल गुलाब का भाई भी कहा जाता है.

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फ्लोरिबंडस

ये संकर समूह के गुलाब होते हैं. इनकी झाड़ियां टी-रोज़ की झाड़ियों से छोटी होती हैं. फूल भी छोटे होते हैं, और झुंड में उगते हैं. फ्लोरिबंडस के पौधे पर हमेशा फूल खिले रहते हैं

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स्टैंडर्ड गुलाब

स्टेंडर्ड्स, जिन्हें स्टेम रोज के नाम से भी जाना जाता है, हायब्रिड पौधे होते हैं पर उनका कलम लगाने का स्थान ऊंचा होता है ताकि पौधों को ऊंचाई मिल सके. रंगीन खुशबूदार फूल पौधे की चोटी पर गुच्छे में आते हैं. वे वाइल्ड रोज के तनों पर टिके होते हैं. स्टैंडर्ड्स की कटाई-छंटाई बाकी हायब्रिड्स की तरह मत कीजिए, बल्कि, चारों-ओर लगभग पांच तने छोड़ दीजिए. वे ज़मीन में सबसे अच्छे उगते हैं और उन्हें सीधा रखने के लिए खूंटे की जरूरत पड़ती है. लोहे या लकड़ी के खूंटे की बजाय प्लास्टिक के खूंटे का उपयोग करें.

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