मुख्य बिंदु

    
  • निर्माणाधीन घरों के लिए GST की दर घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है.
  • अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए GST की दर घटाकर 1 प्रतिशत कर दी गई है.
  • इन दरों में कमी होने से घर बनाने की लागत में कमी आएगी.
  • हालांकि, बिल्डरों के लिए पुरानी दरों पर ITC लाभ के साथ भुगतान करने का विकल्प खुला छोड़ा गया है.
  • अफोर्डेबल हाउसिंग को फिर से परिभाषित किया गया है (महानगरों में 60 वर्ग मीटर से कम कारपेट एरिया; गैर-महानगरों में 90 वर्ग मीटर से कम कारपेट एरिया; और ₹45 लाख तक की कीमत वाले घर).
  • पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त पूरी तरह से बन चुके घरों पर GST लागू नहीं होगा.
    

वस्तु और सेवा कर (GST) परिषद ने अपनी 33 rd बैठक में निर्माणाधीन घरों के लिए GST दरों को घटाकर 5 प्रतिशत और किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) के लिए 1 प्रतिशत कर देने की घोषणा की है, ये दरें 1 अप्रेल 20191 से प्रभावी होंगी. इन दरों में कमी होने से घर खरीदने की लागतों में कमी आने की उम्मीद है.

Eligibilityक्या बदलाव हो रहा है?

इस बदलाव के बाद, किफायती आवासों के लिए GST की दर 8 प्रतिशत से घटकर 1 प्रतिशत हो जाएगी और अन्य घरों के लिए, यह 12 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत हो जाएगी. ये दोनों दरें बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) 2 के हैं. 19 मार्च, 2019 को आयोजित GST परिषद की अगली बैठक (34वीं बैठक) में, यह निर्णय लिया गया कि बिल्डर अपने नए और अधूरे प्रोजेक्टों में कच्चे माल पर ITC लाभ के साथ अधिक दरों का भुगतान करना या बिना किसी लाभ के कम दरों का भुगतान करना चुन सकते हैं. इसका मतलब यह है कि बिल्डर अब यह तय कर सकते हैं कि वे किफायती आवास के लिए 8 प्रतिशत का भुगतान ऐर टैक्स लाभ प्राप्त करना चाहते हैं या टैक्स लाभ के बिना 1 प्रतिशत का भुगतान करना चाहते हैं; अन्य घरों के मामले में, वे ITC लाभ के साथ 12 प्रतिशत का भुगतान या बिना किसी टैक्स लाभ के 5 प्रतिशत का भुगतान करना चुन सकते हैं. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस विकल्प का केवल एक बार उस स्थिति में उपयोग किया जा सकता है जहां निर्माण और बुकिंग दोनों 1 अप्रैल 2019 से पहले शुरू किए गए हैं, लेकिन 31 मार्च 2019 तक पूरे नहीं हुए हैं 3

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Example of subventionGST काउंसिल के अनुसार अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा

GST परिषद ने किफायती आवास की परिभाषा में भी बदलाव किया है. अब महानगरों में 60 वर्ग मीटर से कम कार्पेट एरिया और गैर-महानगरों में 90 वर्ग मीटर से कम कार्पेट एरिया और ₹ 45 लाख 4 तक की लागत वाले घर किफायती आवास की श्रेणी में आएंगे. महानगरों में बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली-NCR (दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद), हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई (मुंबई महानगर क्षेत्र) शामिल हैं. इसका तात्पर्य यह है कि बड़े शहरों (जैसे NCR और MMR) में और अधिक प्रॉपर्टी, किफायती प्रॉपर्टी की श्रेणी में आ जाएगी, और इससे खरीदारों को फायदा होगा. पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त पूरी तरह से बन चुके घरों पर GST लागू नहीं होगा. GST उन्हीं घरों पर लागू होगा जिनका निर्माण पूरा हो चुका है, पर जिन्हें.पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हुआ है5.

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